Bangladesh Model: CJP का अराजकतावादी एजेंडा और लोकतांत्रिक संस्थाओं पर बढ़ता दबाव
अगर Bangladesh Model मानते हैं, तो क्या CJP “Anarchist” है?
CJP का हालिया protest केवल Election Commission की accountability का सवाल नहीं रह गया है। इसके साथ जुड़े slogans, speeches और Bangladesh के “Gen Z movement” का reference इस आंदोलन की राजनीतिक दिशा पर गंभीर सवाल खड़े करते हैं। जब किसी देश में लोकतांत्रिक असहमति को institutional process के बजाय सड़क की शक्ति, दबाव और संभावित regime change से जोड़कर देखा जाने लगे, तो वह आंदोलन लोकतांत्रिक protest से आगे बढ़कर अराजक राजनीति का रूप ले सकता है।
CJP का दावा है कि उसका उद्देश्य Chief Election Commissioner Gyanesh Kumar को हटाना और Election Commission को independent तथा accountable बनाना है। चुनावी संस्थाओं की निष्पक्षता पर सवाल उठाना लोकतंत्र में पूरी तरह वैध है। नागरिकों को यह अधिकार है कि वे electoral rolls, Special Intensive Revision यानी SIR और Election Commission के फैसलों पर स्पष्टीकरण मांगें। लेकिन किसी भी लोकतांत्रिक आंदोलन की credibility केवल उसके मुद्दे से नहीं, बल्कि उसकी भाषा, तरीका और अंतिम उद्देश्य से भी तय होती है।
यहीं CJP की सबसे बड़ी कमजोरी दिखाई देती है। उसके protest का मूल मुद्दा electoral accountability था, लेकिन मंच पर “regime change” और Bangladesh model जैसे संदर्भ आने लगे। Prashant Bhushan ने कहा कि यदि सरकार का कथित barbarism जारी रहा तो regime change होगा और regime change हर citizen का democratic right है। तकनीकी रूप से सरकार बदलना जनता का अधिकार है, लेकिन भारत जैसे लोकतंत्र में सरकार बदलने का संवैधानिक रास्ता elections हैं, न कि अराजक सड़क संघर्ष।
Neha Bora द्वारा Bangladesh के Gen Z movement को भारत के लिए “रास्ता दिखाने वाला” बताना भी गंभीर राजनीतिक भूल थी। Bangladesh का 2024 movement केवल student protest नहीं था। वहां protests के दौरान व्यापक हिंसा, पुलिस कार्रवाई, mass arrests और bloodshed हुआ। संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार कार्यालय के अनुसार, 15 July से 5 August 2024 के बीच लगभग 1,400 लोगों की मौत हो सकती है। ऐसे आंदोलन को बिना उसके violent consequences और institutional collapse के संदर्भ में प्रस्तुत करना एक खतरनाक romanticisation है।
अगर CJP Bangladesh को model मानता है, तो उसे यह भी बताना चाहिए कि वह उस model में किस चीज़ से inspiration ले रहा है। क्या वह peaceful mobilisation, public accountability और youth participation से प्रेरणा ले रहा है? या फिर वह सत्ता परिवर्तन के उस रास्ते को सही मानता है जिसमें institutions कमजोर होते हैं, violence बढ़ती है और elected government street pressure में गिरती है? CJP इस प्रश्न का साफ़ उत्तर देने के बजाय अस्पष्ट भाषा (ambiguous language) का इस्तेमाल करता दिखाई देता है।
यही ambiguity CJP को एक अराजकतावादी political formation जैसा दिखाती है। यहां “anarchist” शब्द का अर्थ केवल हिंसक या देश-विरोधी होना नहीं है। इसका अर्थ ऐसी राजनीति से है जो established democratic institutions पर लगातार अविश्वास पैदा करे, constitutional process को कमजोर बताए और public anger को institutional reform के बजाय uncontrolled confrontation की दिशा में धकेले। CJP पर यही आलोचना लागू होती है कि वह accountability की मांग को constructive institutional debate बनाने के बजाय political spectacle में बदल रहा है।
CJP की “Lehra Do Tiranga” जैसी appeal भावनात्मक रूप से प्रभावशाली हो सकती है, लेकिन national flag को protest politics का central symbol बनाकर हर सरकारी restriction को anti-national या authoritarian बताना भी जिम्मेदार राजनीति नहीं है। लोकतांत्रिक अधिकारों के साथ public order की जिम्मेदारी भी जुड़ी होती है। Protesters को peaceful रहने, traffic और आम नागरिकों को होने वाली परेशानी कम करने तथा पुलिस निर्देशों का पालन करने की जिम्मेदारी है।
दूसरी ओर, पुलिस द्वारा preventive detention और protesters को lawyers से मिलने में कथित बाधा भी चिंता का विषय है। सरकार को dissent को दबाने के बजाय facts और transparent inquiry के माध्यम से जवाब देना चाहिए। लेकिन प्रशासनिक कठोरता CJP की उग्र भाषा को सही नहीं बना देती। यदि पुलिस की गलती है, तो अदालत, media और parliamentary scrutiny के रास्ते उपलब्ध हैं। इन संवैधानिक रास्तों को छोड़कर street confrontation को समाधान बताना लोकतंत्र के लिए नुकसानदायक है।
CJP को यह समझना होगा कि जनता केवल नारों से प्रभावित नहीं होती। उसे evidence, policy और practical alternative चाहिए। Election Commission की आलोचना करनी है तो ठोस दस्तावेज सामने रखे जाएं। SIR पर सवाल हैं तो specific cases और verified data प्रस्तुत किए जाएं। CEC को हटाने की मांग है तो constitutional procedure और वैकल्पिक appointment mechanism भी बताया जाए।
इसलिए CJP को लोकतांत्रिक movement कहने से पहले उसकी भाषा और रणनीति की समीक्षा जरूरी है। Bangladesh model का मतलब bloodshed, regime change और institutional breakdown है, तो उसकी राजनीति निश्चित रूप से अराजकतावादी प्रवृत्तियों की ओर जाती दिखाई देगी। लोकतंत्र को बचाने का दावा करने वाला कोई भी संगठन लोकतांत्रिक संस्थाओं को नष्ट करने वाली राजनीति नहीं अपना सकता। भारत में बदलाव ballot, law और constitutional accountability से होना चाहिए; अराजकता और सड़क की ताकत से नहीं।