एक अमर आदमी की कहानी : अफसोस

    17-Apr-2020   
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चूँकि अभी लॉकडाउन चल रहा है, तो बिंज वॉच तो बनता ही है | और ऐसे में एमेझॉन प्राइम पर कुछ अच्छा सा ढूंढते वक्त मिली यब वेब सीरीज ‘अफसोस’ | एक अलग ही थीम पर आधारित यह वेब सीरीज आपको बांधे रखती है | मन करता है, एक और एपिसोड देख लिया जाए, शायद पता चल जाएगा अमर व्यक्ति कौन है ? तो ये कहानी है नकुल की | जीवन से त्रस्त इंसान जिसके जीवन में कुछ भी अच्छा नहीं है, और वह बार बार  याने कि ११ बार आत्महत्या का प्रयत्न करता है | लेकिन भगवान का आशीर्वाद तो देखिये वो हर बार बच जाता है | और यहीं से शुरु होता है इस कहानी का असली मजा |


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उसे किसी भी हालत में मरना ही है | वह ६ महीने से एक थेरेपिस्ट से बात भी करता है | लेकिन वह मरने के निर्णय पर अडिग है | और अगर वह खुद से नहीं मर सकता तो वह अपने आप को मारने के लिये एक गँग को कॉंट्रॅक्ट देता है | और बस प्लॅन बन जाता है उसे मारने का | लेकिन दूसरी ओर हिमालय में एक आश्रम में १२ साधुओं की हत्या होती है | कहा जाता है, कि इनके पास ऐसा अमृत है, जिससे आदमी अमर हो सकता है | एक बाबाजी जिनका नाम है, ‘फोकटिया बाबा’ वही अमृत लेकर मुंबई आए हैं, ऐसे व्यक्ति को ढूँढने जो कि अमर है | यदि वह अमर व्यक्ति किसी को अमृत पिला देगा तो अमृत पीने वाला व्यक्ति भी अमर हो जाएगा | तीसरी ओर एक जर्मलिस्ट है आएशा, जो इंटरनेट पर एक वैज्ञानिक के व्हिडियोज देख रही है जो ‘अमरत्व’ याने कि ‘इम्मोर्टेलिटी’ पर रीसर्च कर रहा है, और साबित कर चुका है कि लोग अमर हो सकते हैं, विज्ञान के सहारे से |आएशा उस पर खबर लिखती है, और कहा जाता है कि इसी कारण हिमालय में साधुओं की हत्या हो गई | चौथी ओर उत्तराखंड से एक पुलीस अफसर बंबई आया है, फोकटिया बाबा को ढूंढने क्यों कि अमर होने की अमृत उसके पास है | यहाँ नकुल को उसकी थेरेपिस्ट श्लोका से प्यार हो जाता है, और उसकी लिखी कहानी किताब के रुप में छपने के भी आसार नजर आने लगते हैं, पहली बार उसके जीवन में कुछ अच्छा होने लगता है, तो उसका मरने का प्लान कँसल हो जाता है | और जिसको उन्होंने कॉंट्रॅक्ट दिया है, वे कॉंट्रॅक्ट खत्म करने से इन्कार कर देते हैं | कॉंट्रॅक्ट किलर उपाध्याय नकुल को मारने का भरसक प्रयत्न करती है, लेकिन वह मरता नहीं, वैज्ञानिक का आदमी नकुल के पीछे पड जाता है, उसे अमर समझ कर, और ये सारे लोग एक साथ एक समय में एक दूसरे में उलझ जाते हैं | 




आप भी उलझ गये होंगे ना ये सब पढ कर | होता है… कहानी देखते वक्त भी कई बार ऐसा ही होता है | लेकिन इस उल्झन और कन्फ्युजन में ही तो मजा है, और उत्सुकता भी कि आगे क्या होने वाला है | सब सोचते हैं कि नकुल अमर है, फिर कुछ ऐसा होता कि लगने लगता है उपाध्याय अमर है, फिर कहीं वो श्लोका तो नहीं? या फिर नकुल ही अमर है ? वैसे अंत में आखरी ८वें एपिसोड में इस रहस्य पर से पर्दा उठ ही जाता है | मैं वह आपको नहीं बताउंगी | लेकिन इस वेब सीरीज की कॉन्सेप्ट और कहानी के लिये इसे १० में से १० नंबर मिलने चाहिये | 

इस वेब सीरीज में प्रमुख भूमिका, गुल्शन देवई, सुलग्ना पाणिग्रही, अंजली पाटिल, हीबा शाह, आकाश दहिया, रत्नबाली भट्टाचार्य, जेमी ऑल्टर, दाशिन सेट, इन्होंने निभाई है |सभी के अभिनय की दाद देनी पडेगी | खासकर नकुल के किरदार में गुल्शन देवई और फोकटिया बाबा के किरदार में रोबिन दास इन्होंने बहुत ही उम्दा अभिनय किया है | वेब सीरीज का निर्देशन किया है, अनुभूती कश्यप ने | सस्पेंस, थ्रिलर कहानियाँ भी कई बार मोनोटोनस या क्लीशे हो जाती हैं, लेकिन ‘अफसोस’ की कहानी बहुत अलग है | शायद आखरी आखरी में आपको लगे भी की ये क्या हो रहा है, शायद थोडी स्लो लगे, लेकिन जब आप आखरी एपिसोड देखेंगे तो आपको सबकुछ Worth लगने लगेगा | 


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तो उस लास्ट एपिसोड के लिये ये सीरीज जरूर देखें | और हाँ इनमें से एक ना एक व्यक्ति तो अमर है | कौन है वो जानने के लिये तो जरूर ही देखिये ‘अफसोस’ |


- निहारिका पोल सर्वटे